Tuesday, June 22, 2021

दूसरा मस्तिष्‍क क्‍यों कहा जाता है आंत को

Stomachइंसान के शरीर में दूसरा मस्तिष्‍क आंत को कहते हैं। जिसमें एक रीढ़ की हडडी से जयादा न्‍यूरॉन होते हैं और ये शरीर के केन्‍द्रीय तंत्रिका तंत्र से बिल्‍कुल अलग है। आंत का जटिल काम ही हमारे स्‍वास्‍थ्‍य को प्रभावित करता है। इस पर डॉक्‍टर का मानना है कि पाचन प्रणाली खाने को पचाने के अलावा भी कई काम करती है। डॉक्‍टर इसके बारे में पता लगा रहे हैं कि क्‍या इसकी मदद से दिमागी बीमारी और प्रतिरक्षा प्रणाली से जुड़ी बीमारियों का इलाज हो सकता है या नहीं।

इस बारे में डॉक्‍टर रॉसी बताती हैं कि हमारे शरीर के बाकी अंगों से अलग आंत अकेला काम करता है। अर्थात इसकी कार्यप्रणाली किसी अन्‍य प्रणाली से प्रभावित नहीं होती। इसे काम करने के लिए इंसान के मस्तिष्‍क से निर्देश की आवश्‍यकता नहीं होती है। आंत का नियंत्रण आंतरिक तंत्रिका तंत्र काम करता हैा ये एक स्‍वतंत्र तंत्रिका तंत्र है जिसका कामकाज केन्‍द्रीय तंत्रिका तंत्र से बिल्‍कुल अलग होता हैा इसके लिए सीधे तौर से पाचन प्रणाली के लिए जिम्‍मेदार होता है।

ये तंत्रिका तंत्र उतकों के जरिए पूरे पेट और पाचन प्रणाली में फैला होता है। साथ ही इसके अपने तंत्रिका सर्किट होते हैं। जबकि केन्‍द्रीय तंत्रिका तंत्र से स्‍वतंत्र रूप से काम करने वाली ये तंत्रिकाएं केन्‍द्रीय तंत्रिका तंत्र से संपर्क में रहती है। व्‍यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए आंतों की भूमिका बेहद महत्‍वपूर्ण है। रोग प्रतिरोधक प्रणाली की 70 फीसदी कोशिकाएं आंत में होती है। अगर कोई व्‍यक्ति को आंत से जुड़ी कोई परेशानी है तो वह सामान्‍य बीमारियों जैसे फ़लू का शिकार आसानी से हो जाता है।

50 प्रतिशत वैक्‍टीरिया होते हैं हमारे मल में

हमारे मल पूरी तरह शरीर ना निकलने वाला नहीं होता है। इसका लगभग 50 प्रतिशत हिस्‍स बैक्‍टीरिया होता है जो बहुत ही फायदेमंद होते हैं। डॉक्‍टर रेशी ने बताया कि शोध कहते हैं कि एक स्‍वस्‍थ्‍ शख्‍स एक दिन में तीन बार से लेकर एक हफते में तीन बार तक मल का त्‍याग करता है। हमारी आंत में अरबों की संख्‍या में माइक्रोब्‍स काम करते रहते हैं जो शरीर को रोगाणुओं से बचाते हैं। भोजन से शरीर को उर्जा देने का काम करता है और शरीर को विटामिन देता है।

हमारा भोजन करना कितना जरूरी है

माइक्रोब्‍स एक छोटे बच्‍चे की तरह होते हैं इस कारण इनका खास ख्‍याल रखना पड़ता है। माइक्रोब्‍स को विभिन्‍न तरह के भोजन से पोषण मिलता हैा साफ शब्‍दों में कहें तो जितना अधिक विविध प्रकार का आपका भोजन होगा माइक्रोब्‍स उतने ही विभिन्‍न प्रकार और स्‍वस्‍थ होंगे। अगर आप एक ही तरह का खाना ज्‍यादा खाते हैं तो आपका माइक्रोब्‍स काफी कमजोर होगा।

स्‍ट्रेस से आंतों का क्‍या कनेक्‍शन है

इस पर डॉक्‍टर रॉसी का कहना है कि अगर आपको आंत से जुड़ी कोई परेशानी हो रही है तो सबसे पहले ये देखें कि क्‍या कितने मानसिक तनाव में हैं। मैं अपने मरीजों को दिनभर में 15 से 20 मिनट तक मेडिटेशन की सलाह देती हूं। इस पर कई तरह के शोधों के बाद यह सामने आया है कि मानसिक बीमारियों जैसे डिप्रेशन से जूझ रहे लोगों के माइक्रोब्‍स सामान्‍य लोगों के माइक्रोब्‍स से अलग होते हैं। कुछ आंतं सामान्‍य से ज्‍यादा संवेदनशील होते हैं। डॉक्‍टर मेगन रॉसी एक शोध का हवाला देते हुए कहती हैं कि अगर आप किसी एक तरह के खाने को खाने से डरते हैं और उसे खा लेते हैं तो आपको पेट में दर्द का अहसास होता है। दरअसल ये डर ही इस लक्षण को जन्‍म देता है।

डॉक्‍टर का कहना है कि अपने क्‍लीनिक में मैंने कई ऐसे लोगों को देखा है जहां उनका यकीन उनकी बीमारी का कारण बन जाता है। डॉक्‍टर के अनुसार कुछ चंद बातों का ख्‍याल रखकर आप अपने पाचन स्‍वास्‍थ्‍य और आंतों के माइक्रोब्‍स को और भी बेहतर बना सकते हैं, जैसे

  • विभिन्न प्रकार के भोजन का सेवन करें इससे माइक्रोबियम स्वस्थ बनेंगे।
  • तनाव को कम करने के लिए मेडिटेशन और मानसिक योगा करना चाहिए।
  • अगर आपको आंत से जुड़ी कोई परेशानी है तो शराब का सेवन ना करें।
  • कैफ़ीन और मसालेदार खाने का सेवन ना करें।
  • बेहतर नींद लें। अगर आप नींद से समझौता कर रहे हैं तो ये आपके आंतों के माइक्रोब्स के लिए नुक़सानदायक हो सकता है।
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