Sunday, September 19, 2021

स्वास्थ्य के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनता डायबिटीज़

Diabetesडायबिटीज़ की समस्या वर्तमान समय में सबसे बड़ी स्वास्थ्य चुनौती बनती जा रही है. ऐसे तो हम आम बोलचाल में डायबिटीज के हर केस को एक तरह से ही देखते हैं, लेकिन असल में ऐसा नहीं होता. डायबिटीज मुख्य रूप से दो प्रकार की होती है- टाइप-1 डायबिटीज़ और टाइप-2 डायबिटीज़.

टाइप-1 डायबिटीज़- टाइप- 1 डायबिटीज़ में इंसुलिन का बनना कम हो जाता है या फिर इंसुलिन बनना बंद हो जाता है. टाइप-1 डायबिटीज की समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है. इस प्रकार के डायबिटीज़ में पैन्क्रियाज़ की बीटा कोशिकाएं पूरी तरह से नष्ट हो जाती हैं. यह जैनेटिक एवं कुछ वायरल संक्रमण के कारण होता है.  स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, भारत में टाइप-1 डायबिटीज़ के केस मात्र एक प्रतिशत ही देखने को मिलते हैं. इसके लक्षण हैं- शरीर में पानी की कमी होना, हर वक्त थकान महसूस होना, धड़कन तेज़ होना.

टाइप- 2 डायबिटीज़- टाइप-2 डायबिटीज से ग्रस्त लोगों के ब्लड शुगर का स्तर बहुत ज़्यादा बढ़ जाता है, जिसे नियंत्रित करना मुश्किल होता है. इस स्थिति में पीड़ित व्यक्ति को अधिक प्यास लगती है और लगातार भूख लगने जैसी समस्याएं सामने आती हैं. टाइप-2 डायबिटीज की समस्या किसी को भी हो सकती है, लेकिन बच्चों में इसके मामले ज्यादा देखने को मिलते हैं. टाइप-2 डायबिटीज में शरीर इंसुलिन का सही तरीके से प्रयोग नहीं कर पाता है. आजकल के समय में व्यायाम के अभाव और फास्ट फुड के अधिक सेवन के कारण बच्चों में टाइप-2 डायबिटीज के केस ज्यादा देखने को मिल रहे हैं. खासकर यह 12 या 13 साल के बच्चों में अधिक होता है. वहीं पुरुषों के मुकाबले महिलाएं भी इसकी ज्यादा शिकार होती हैं. ज्यादा वजन वाले लोगों पर इस बीमारी का खतरा अधिक होता है. इसके लक्षण हैं- कम दिखना, सिर दर्द, कोइ चोट लगने या घाव होने पर जल्दी ठीक ना होना आदि.

वो चाहे टाइप-1 डायबिटीज हो या टाइप-2, कई बार इसका कारण जैनेटिक भी होता है. डायबिटीज़ से बचाव के निम्नलिखित उपाय हो सकते हैं:-

इंसुलिन का प्रयोग : मधुमेह की रोकथाम के लिए इंसुलिन को सबसे कारगार उपाय माना जाता है और ज़्यादातर डॉक्टर्स भी इंसुलिन का ही परामर्श देते हैं. इंसुलिन एक तरह का हॉर्मोन है, जो हमारे शरीर के लिए बहुत उपयोगी है. इसके जरिए ही रक्त कोशिकाओं को शुगर मिलती है, यानि इंसुलिन शरीर के अन्य भागों में शुगर पहुंचाने का काम करता है, जिससे कोशिकाओं को ऊर्जा मिलती है.

स्वस्थ खाएं : जितना हो सके वसा और कार्बोहाइड्रेट वाले भोजन से दूर रहें. ताज़े फल,  सब्जियां, साबुत अनाज, डेयरी उत्पाद और ओमेगा-3 फैट को अपने भोजन मे शामिल करें. इसके अलावा फाइबर का सेवन भी ज़रूर करें.

पर्याप्त नींद लें : रोजाना कम से कम 7 से 8 घंटे की नींद लेनी चाहिए. पर्याप्त नींद आपकी उर्जा को बचाएगी और आप हमेशा तरोताज़ा महसूस करेंगे.

शारीरिक रूप से सक्रिय रहें : शरीर को स्वस्थ रखने का सबसे अच्छा तरीका है कि जितना हो सके शरीर को सक्रिय रखें इसके लिए रोज़ाना व्यायाम ज़रूरी है. व्यायाम करने से ना केवल मधुमेह कम होता है बल्कि ये आपके पूरे शरीर को स्वस्थ रखता है. खासकर मोटापे से ग्रस्त लोगों को अपने जीवन में व्यायाम को ज़रूर शामिल करना चाहिए, क्योंकि इससे पूरे शरीर मे चुस्ती-फुर्ती बनी रहती है और आप स्वस्थ महसूस करते हैं.

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About गौरव कुमार

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